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Hymn No. 1164 | Date: 18-Jun-1999
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प्रभु तेरे चरण में बैठ गुहार लगा रहा हूँ ये तेरा आम भक्त ।
प्रभु तेरे चरण में बैठ गुहार लगा रहा हूँ ये तेरा आम भक्त ।
कुछ खास नहीं है मेरे पास, जो दे सकूँ तुझको अलग से ।
मेरी बुद्धि ना है विशाल, जो आत्मसात कर सके तेरे ज्ञान को ।
इच्छाओं में डूबा हुआ हूँ इतना, प्रेम की निर्मल धार की समझ ना है मुझे ।
तेरा नाम लेता हूँ बारंबार, फिर भी घुटने टेकता हूँ कामनाओं के आगे ।
करने न आया ढंग से कोई कार्य, कैसे रँगेगा तू अपने रंग में ।
प्रतिक हूँ दुनिया के सारे दोषों का, तेरा प्रेम है जो तुमने पास बुलाया ।
सद्गुणों से ना भी यारी जन्मो-जन्म से, अधर्मी सबसे बडा संसार में ।
मैंने धोखा दिया है अपनेआप को कई बार, पर तुझे ना दिया एकबार ।
मुझे ना कर तू प्यार, दे-दे पीड़ा सारे जग की, तू मुझे उपहार में ।


- डॉ.संतोष सिंह