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Hymn No. 114 | Date: 07-Nov-1997
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मेरा प्यार तू है मेरा यार तू है तू ही तो मेरा दिलबर है ।
मेरा प्यार तू है मेरा यार तू है तू ही तो मेरा दिलबर है ।
रूठता हूँ तो मैं तुझसे ही, मानता हूँ मैं तुझको ही ।
इस जहाँ में हर तरफ हर रूप में तू ही नजर आता है ।
हँसते हँसाते तू रूला जाता है हमको रोते – रोते तू हँसा जाता है ।
कर्मों के बंधन में बांध के, माया में तू हमको उलझा जाता है ।
मेरा प्यार तू है मेरा यार तू है तू ही तो मेरा दिलबर है ।
जब भी चाहा मैं ने तुझसे दूर होना, उतना ही तेरे पास आया ।
दिन हो या रात कहने को व्याकुल हूँ मन की हर बात तुझसे ।
अंजाम चाहे अब जो भी हो रहना चाहूँ तेरे पास हर वक्त ।
मेरी तडप देख तूझे आता हो मजा तो दे दे मुझे ढेर सारी सजा ।
मेरा प्यार तू है मेरा यार तू है तू ही तो मेरा दिलबर है ।
दिल का हर कोना चुन - चुनके तेरी यादों के संग संजोया है ।
आँसूओं की हर बूंद को गीतों की माला में पिरोया है तेरे वास्ते ।
दिन से भली तो रात है तुझसे मैं मिलता हूँ ख्वाब में सही ।
जीने का अंदाज है तेरा निराला प्यार करना और नजर न आना ।
मेरा प्यार तू है मेरा यार तू है तू ही तो मेरा दिलबर है ।


- डॉ.संतोष सिंह