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Hymn No. 1166 | Date: 19-Jun-1999
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रट लगाता हूँ, माँ तू कब आएगी, प्यार पुत्र का कब तुझे रीझाएगा ।
रट लगाता हूँ, माँ तू कब आएगी, प्यार पुत्र का कब तुझे रीझाएगा ।

हर इक दिन नया-नया गीत सुनाता हूँ माँ याद कर-करके तुझे ।

हमने देखा है माँ को अपने पुत्र को मनाते हुए, यहाँ क्यों उलट जाते है सब नियम ।

हम भी जिद करना चाहते है, प्यारी माँ का प्यार पाने के वास्ते ।

मत बंद कर तू सारे रास्ते, तेरे दर पर आने के वास्ते ।

निपट अकेले है ससार में, माँ तू ना सँभालेगी तो कौन सँभालेगा हमे ।

होगी चाहे लाखों कमियाँ, माँ मिटानी होगी तुझे सारी दूरियाँ ।

माना की आज हमारे कदम लडखड़ाते है, दूर कर दीखाएँगें तेरे प्यार के सहारे।

माँ हमे ना चाहिए कुछ तुझसे, दे दे आचल की छाव तेरी ।

माँ तेरा पुत्र बाहें फैलाए है खड़ा, तेरी गोद में समाने के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह