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Hymn No. 1167 | Date: 19-Jun-1999
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मन रूठा जरूर है कई बार तुझसे, पर दिन ना टूटा एक भी बार ।
मन रूठा जरूर है कई बार तुझसे, पर दिन ना टूटा एक भी बार ।
संसार को बसानेवाले, कर ले हम को तू अपने चरणों में स्वीकार ।
नहीं चाहते तुझसे कुछ तेरे प्यार के सिवाय, चाहे हो लाखों जरूरतें हमारी ।
झोली फैलाए खडा हूँ तेरे प्यार के वास्ते, ना किसी सौदे के वास्ते ।
परीक्षा अब ना ले और हमारे प्यार की, मैं फेल-पास होने आया नहीं हूँ ।
तू मत लगा हमारे प्यार की कीमत, मिली है हमको ये सौगात तुझसे ।
तुझसे हुआ है प्यार यूँ ही, ना कुछ और जरूरत से ।
लाख हो जाए बंद मेरे रास्ते, पाएगे हम तुझे प्यार के सहारे ।
दया करके ना तू करना प्यार, भर दे सामर्थ्य हम में इतना, मजबूर होना पड़े तुम्हें ।
सवार हो जाए तेरे प्यार की मस्ती, मिलकर तू भी भूल बैठे सब कुछ ।


- डॉ.संतोष सिंह