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Hymn No. 1168 | Date: 19-Jun-1999
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कयामत है तेरा रूप, अंजाम क्या होगा प्यार में हमारा ।
कयामत है तेरा रूप, अंजाम क्या होगा प्यार में हमारा ।
बरसाती है कहर हमपर तेरी नजर, मिलते ही जान जाती है निकल ।
इनायत ना चाहते है तुझसे, इकरार करना तू हमारा प्यार देखकर ।
अंजाम की परवाह ना है हमको, मजबूर है दिल के हाथों हम ।
करना है जो तुझे कर ले वह तू, हम तो प्यार कर चुके है तुझसे ।
ढाना जो तू चाहे वह सितम, रोकेंगा ना हम, सितमगर प्यार के राह पर ।
प्यार में पीना पड़ा जहर, तो पी जाएँगे बेहिचक मिले अगर वह हाथो तेरे ।
मंजूर है तेरा प्यार पाने के वास्ते हर वह सजा, जिसे देखकर काप जाए सारा जहाँ
तिल-तिल तड़पाकर तू मारना मुझे, कसम से मिटने ना दूँगा दिल से यादों को तेरे ।
कभी ना था मैं, कभी ना रहूँगा, प्यार में था तेरे, प्यार में रहूँगा सदा तेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह