VIEW HYMN

Hymn No. 1169 | Date: 20-Jun-1999
Text Size
भूल हुई हो हमसे कुछ, माफ करना ओ! मेरी माता ।
भूल हुई हो हमसे कुछ, माफ करना ओ! मेरी माता ।
तेरे सिवाय नहीं कही है जाना, ओ! मेरी प्रिय माता ।
खाली झोली भरी है तुमने, पुकारें हम क्यों किसी और को ।
उपजे है आँसू श्रद्धा के, ना कि दुःखों से घबराकर ।
मंजूर है हर वह बात, जिससे तू है सहमत, औ! मेरी माता ।
न आशा है ना निराश हूँ, ये गीत तुझसे, ना ही फऱीयाद है ।
यह तो हमारे दिल का इक भाव है, जो दर्शाए कि तुझसे प्यार है ।
जो कुछ सीखा तुझसे ही, वही बयाँ करता हूँ अपने गीतों में ।
अंदाज है अपना कुछ नया-नया, अपना प्यार जताकर तुझे रीझाने का ।
सताने न आया हूँ माँ, मैं तो मथ्था नवाने आया था दर पर तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह