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Hymn No. 1175 | Date: 23-Jun-1999
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प्रिये जय हो तेरी जय हो, तेरे दरबार में आया हूँ जयजयकार करने ।
प्रिये जय हो तेरी जय हो, तेरे दरबार में आया हूँ जयजयकार करने ।

दिलो में प्यार की ज्योत जगाई तुमने, श्रद्धा से साकार करने आया हूँ ।

विश्वास का जो तिनका है पकड़ा, उसे बदलने आया हूँ परम विश्वास से ।

प्रिये जय हो, तेरी जय हो, तेरे दरबार में आया हूँ जयजयकार करने ।

श्वास दर श्वास समीप होता जाऊँ तेरे, इतना करीब, चाहकर भी अलग हो ना जाऊँ

रहे हमारे दिल में सदा छवी तेरी, मुलाकात के लिए न जाना पडे कहीं और । प्रिय जय.....

मंजिल कहाँ कुछ ना है खबर, हम तो तेरे प्यार में होना चाहते है बेखबर ।

रहबर तेरी अनुकंपा है हम पर, सहजता से जो ढाल दिया तुमने प्यार में अपने | प्रिये जय हो .....


- डॉ.संतोष सिंह