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Hymn No. 1176 | Date: 23-Jun-1999
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बुलाकर करीब तू अपने, प्यार की घुट्टी पिलाता है हमे ।
बुलाकर करीब तू अपने, प्यार की घुट्टी पिलाता है हमे ।
बिन माँगे अमुल्य धन पर देता है, अपनी कृपा बरसाकर ।
सदियों के मारे हुए को, दिया स्थान चरणों में तुमने अपने ।
रहमत है हम पर तेरी बहुत, जिसने बदल दिया किस्मत को ।
इस दास ने जो सोचा न था, इतना पास बुलाया तुमने अपने ।
आकार दिया तुमने हमारे सपनों को, तुच्छ का प्यार स्वीकार कर ।
मन के सारे संतापो को हर लिया, अपना अमूल्य प्यार देकर ।
जो ख्वाबो में देखा था, वह साकार होने लगा, तेरी इनायत से ।
जाग उठा मेरे भीतर का इंसान, तेरी इनायत से ।
मसीहा है तू हमारा, लिखी जाएँगी समय के संग, हमारी किस्से कहानियाँ ।


- डॉ.संतोष सिंह