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Hymn No. 1177 | Date: 24-Jun-1999
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दिल की दिल में ना बहने दे तू, कह लेने दे तू मुझे आज हर बार पूरी ।
दिल की दिल में ना बहने दे तू, कह लेने दे तू मुझे आज हर बार पूरी ।
मानता हूँ कि तू जानता सब कुछ, कह के बोझ हल्का कर लेना चाहता हूँ मन का ।
तू ना देना मेरे सारे सवालों का जवाब, पर सुनना मेरी हर बात पूरी ।
ढोता फिर रहा हूँ न जाने कब से, इस बोज को आज उतार लेने दे तेरे श्री चरणों में बैंठकर ।
न चाहा था वह भी उपजा मन में, कहने और करने में फर्क कर गया ।
भूल ये कैसे हुई, जो दुःख बनकर समा गई मेरे मन-मस्तिष्क में ।
लडूँगा क्या किसी से मैं, मेरी सारी शक्ति चूक गई लड़के इन सब से ।
दम निकलता है तो निकल जाने दे, घूटने टेकने का आदी नहीं मैं ।
हम तो कहेंगे ना तुझसे मदद करने को, जानते है, तू समझता है सब कुछ ।
सपने देखेंगे तेरे दिन-रात, तेरे ख्यालों में घूमते फिरेंगे सारे जहाँ में ।


- डॉ.संतोष सिंह