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Hymn No. 1178 | Date: 24-Jun-1999
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प्रभु कर दे कृपा तू इतनी, तेरी हर कही हुई बात उतर जाए दिल में मेरे ।
प्रभु कर दे कृपा तू इतनी, तेरी हर कही हुई बात उतर जाए दिल में मेरे ।
ढल जाए मेरे वर्तन में अपनेआप, तेरे अनुरूप बनकर रहूं मैं हर पल ।
सारे करम करते हुए, तेरे मुताबिक जीवन में जीता रहूँ मगन होकर तुझमें ।
कसमें ना देनी है, तेरी मर्जी में जो आए वह कर तू, मुझे अपने करीब रखना सदा ।
डरता नहीं मैं अब किसी से, तरसता हूँ तुझे प्यार करने के लिए, रूठे सभी रूठना ना तू कभी ।
साँस थमती है, थम जाने देना, करना कृपा तू हमपर इतनी, लूँ आखरी साँस तेरे नाम की ।
गमों का है जाम बहुत पीया, घबड़ाया ना कभी, अब पीला दे तू अपने प्यार का जाम ।
दाम लगाने की ताकत नहीं तेरे साथ का, जन्मो-जन्म बीते तेरी सेवा करते, चुका नहीं सकता दाम पल भर का ।
एहसास रहे ये दिल को, तू है साथ-साथ, अंत होते जाएगा मेरे मन का अनंत में ।
मस्ती और आनंद का है तू महासागर, फूट जाए मेरा घड़ा, समा जाऊँ तेरी विशालता में ।


- डॉ.संतोष सिंह