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Hymn No. 1179 | Date: 24-Jun-1999
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लगा के आग सीने में, भागता है तू दूर क्यों ।
लगा के आग सीने में, भागता है तू दूर क्यों ।
कितना भी कह लेना, बयाँ कर जाता है नजर, प्यार को तेरे ।
वादा कोई नहीं किया तो क्या नजर लड़ाई तुमने क्यूं हमसे ।
मत शक कर हमारे प्यार पर, हर तुफाँ को झेल जाएँगे तेरे प्यार में ।
दामन लहराया तुमने फिजा में, पागल प्यार ने लिया लपेट, तो क्या करें ।
मजबूर हो गए है दिल से हम, तेरा मीत बनने के लिए जीतेंगे दूनिया की हर जंग ।
अंग-अंग में बस गया है तेरा प्यार, जुदा होना पड़ा तन से, तो हो जाएँगे तेरे वास्ते ।
भीख ना देना तू हमें, दे दे हिम्मत इतनी, जीत ले प्यार से अपने तुझको ।
बैरी बन गया हूँ मैं अपने आपका, सनम तेरे प्यार के फेरे में ।
जहर बन गया जीवन का हर वह पल, जब याद न आई दिल को तेरी ।


- डॉ.संतोष सिंह