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Hymn No. 1181 | Date: 26-Jun-1999
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सुनकर अनसुनी ना कर तू पुकार हमारी, ऐ कर्ता-धर्ता संसार के ।
सुनकर अनसुनी ना कर तू पुकार हमारी, ऐ कर्ता-धर्ता संसार के ।
गुहार तुझसे ना लगाए तो किससे, लगायेगे, ऐ मेरे परमपिता परमेश्वर ।
याचक बनकर आया हूँ द्वार तेरे, कर ले तू स्वीकार मेरी याचना ।
तुमने की है कृपा अनेकों पर और हमपर हर बार, कर दे उध्धार मेरी मा का ।
होंगे लाखों दोष उस में, पर मत्था नवाया है द्वार पर तेरे ।
सार्मर्थ्यहीन है वह अबुला, भूखी है तेरे निर्मल प्यार की ।
करना होगा सुधार उसकी प्रकृति में, रहती है जिससे तन-मन की तबियत ।
प्यारी है माँ दुखों की मारी, जारी यात्रा उसकी, अधूरी रहने ना देना तू। खराब
बरसा दे तू कृपा उसपर अपनी, पल भर में बदल जाएगी तबियत उसकी ।


- डॉ.संतोष सिंह