VIEW HYMN

Hymn No. 1182 | Date: 26-Jun-1999
Text Size
करीब होकर तू करीब क्यों ना लगे इस गरीब को ।
करीब होकर तू करीब क्यों ना लगे इस गरीब को ।
चाहतें होगी हजारों मन में, पर भूखा हूँ तेरे प्यार का ।
बाट जोही न जाने कब से, तेरा प्यार पाने के लिए ।
जो भी थी हम में खराबी, हम तो बन चुके साकी शराबी ।
प्यार का जाम पीते है, सुबह हो या शाम, धूत रहते है नशे में ।
होश की बात ना कर, मदहोशी बढ़ा दे प्यार का जाम पिलाकर ।
आखरी दम तक घूँट भरना चाहता हूँ तेरे हाथों प्यार का ।
यार मेरी तकदीर ना बदलकर, बना दे प्यार में चूर बावरा ।
सँवरने की चाहत ना रही कभी, बिखर जाने दे महक बनकर फिजा में ।
तेरी हर रजा मंजूर है, दौर जारी रखना पीने और पिलाने का ।


- डॉ.संतोष सिंह