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Hymn No. 1184 | Date: 27-Jun-1999
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राह दिखायी तुमने प्यार की उद्धत हो गया चलने को उसपर दिल मेरा ।
राह दिखायी तुमने प्यार की उद्धत हो गया चलने को उसपर दिल मेरा ।
बेधड़क बढ़ चलो उसपर आते रहे न जाने कितने टेडे-मेडे मोड ।
हर डर भाग गई, प्यार पर हमारा परम विश्वास देखकर ।
राह में मिले सुंदर पड़ाव अनेक, जुडा जो था तुझसे, रूक ना पाया कहीं औरा ।
गुंज रही थी भीतर से तेरी आवाज, तरस बढ़ा देती मिलन के वास्ते ।
बंद हो गया मेरा मैं, जो हम तुझसे, मिलने को निकल चले ।
दूरियाँ बदल गई नजदीकियो में, जो प्यार के अटूट बंधन में बँध गए ।
दूर-दूर तक निशान न था गम का, हर श्वास में भरता था तेरे नाम का दम ।
हरदम रहे तेरा-मेरा रिश्ता, चाहे दम निकल जाए तन-मन का ।
तेरी कृपा चाहते है तब तक, जब तक सदा के वास्ते तेरे न बन जाए ।


- डॉ.संतोष सिंह