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Hymn No. 1187 | Date: 29-Jun-1999
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डूबा रहने दे तू हमें मोहब्बत भरे ख्यालों में ।
डूबा रहने दे तू हमें मोहब्बत भरे ख्यालों में ।
रातों की नींद न आई, विचरते रहे तेरे संग ख्वाबों में ।
जीवन हो पर जीवन का कोई चिन्ह ना रहे, खो जाए हम इतना ।
मन का तू अंत कर दे, जुड जाए जो तुझसे इतना ।
जीतना ना है हमें कुछ, हार जाए मोहब्बत में सब कुछ अपना ।
जपना ना पड़े नाम तेरा, दिल धड़के तेरे नाम-तरंगों के संग ।
बुद्धि मेरी जाती रहे, बावरा बनकर फिरुँ मोहब्बत में ।
कमबख्त मै बनकर क्यों अलग हूँ, मिट जाए मोहब्बत के हम में ।
ना चाहिए कुछ तेरे सिवाय, जो तुझमें है, कही और नहीं ।
जाता है सब कुछ छोड़ मेरा, तो जाने दे, मोहब्बत भरी सोहबत दे-दे हमे ।


- डॉ.संतोष सिंह