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Hymn No. 1189 | Date: 30-Jun-1999
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पधारो मारा घर ओ घनश्याम, बाट जो हो, न जाने कब से ।
पधारो मारा घर ओ घनश्याम, बाट जो हो, न जाने कब से ।
हाँ है दिल हैरान, कहाँ हो गई प्यार में हमसे भूल ।
जब से मानव तन पाया, जुड़ गई मन से न जाने कितनी खामियाँ ।
दूर ले गई तुझसे, कराके कोई ना कोई भूल हमसे ।
बेधड़क हो चला दिल मेरा, जो पाया प्यार भरा साथ तेरा ।
गलत हो या सही, सुख हो या दुःख, इन सबमें रमता रहूँ प्यार में तेरे ।
तबदील हो जाना चाहता हूँ मिट्टी के ढेर में, होना ना पड़े परेशान देने में आकार मुझे ।
बाहें पसारे, पलके बिछाए, इंतजार रहता है मुझे तेरे पास आने का ।
दाग होंगे दामन में कई, दिल में कोई शक ना है तेरे प्यार के प्रति ।
कदम आज ल़ड़खडाते होंगे जरूर तेरे प्यार की मस्ती में, सख्ती से बढेंगे जरूर ।
- डॉ.संतोष सिंह
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तकदीर बनानेवाले प्यार भर दे, हमारे जीवन में ।
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