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Hymn No. 1191 | Date: 01-Jul-1999
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लाखो है कमियाँ हममें प्रभु, पर ये दिल हो चुका दीवाना तेरे वास्ते ।
लाखो है कमियाँ हममें प्रभु, पर ये दिल हो चुका दीवाना तेरे वास्ते ।
अभी मन में होगी अनेक इच्छाएँ, उसी मन में है इच्छा तेरे चरणो में रहने की ।
दुःखो में कई बार घिरता हूँ, पर एक दुःख ये भी है तुझे प्यार न कर पाने की ।
सुख जब-जब मिला, तब-तब एहसास हुआ दिल को तेरे प्यार का ।
अब बंदगी कही भी कर लेता हूँ, जो छवि नजर आती चित्त में ।
सपने अब भी आते है, किसी ना किसी रूप में जुडे जो रहते है तुझसे ।
खेल-खेलते थे अपनेआप से, तेरा खेल देखकर मन रीझ गया तुझपर ।
लुभाता है जगत व्यवहार में कई बार, पर तेरे गीतों के आगे चलती ना किसी की।
हालात से डरकर भागने से अच्छा है, तेरी स्मृति बनी रहे दिलो दिमाग पर ।
कहता रहे कोई भी कुछ, हम विस्मृत रहे तेरे हर नये-नये प्यार भरे अंदाज पर ।


- डॉ.संतोष सिंह