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Hymn No. 1193 | Date: 02-Jul-1999
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झुम-झुमके नाच रहा है ये दिल, काका-काका शोर मचाकर ।
झुम-झुमके नाच रहा है ये दिल, काका-काका शोर मचाकर ।
जो मन में था वह आज हो गया पूरा, काका तुझे पाकर ।
गुमसुम से जीवन में आया मस्ती का सैलाब, तेरी नजर पड़ते ही हमपर ।
उलझने तार-तार हो गई, जो बरसी तेरी कृपा हमपर ।
ना रहने क शोक जाता रहा, ज्यों-ज्यों तुझसे जुड़ता मैं चला ।
चिरकर दिखाने को व्याकुल हो उठा, दिल में बसी है बस तस्वीर तेरी ।
जीवन के दो पहलु एक हो हुए, जैसे-जैसे बढ़ता गया प्यार तेरे प्रति ।
कहना-सुनना कुछ बाकी ना रहा, नजर मिलते ही हम सब जान गए ।
नशा अब उतरता नहीं तेरे प्यार का, जो गूँजे गीत तेरा हर पल हमारे भीतर ।
मदहोशी छा गई है हमपर, जो तेरे चरणो में पहूँच जाते है हम ।


- डॉ.संतोष सिंह