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Hymn No. 1194 | Date: 02-Jul-1999
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गजबजा गया हूँ काका, दुनिया भर की दुनियादारी से ।
गजबजा गया हूँ काका, दुनिया भर की दुनियादारी से ।
मजा ले लेने दे, तेरे अप्रीतम प्रेम रस का मुझे ।
हढ ना है ये मेरा, मचल जाता है देखकर दिल तुझे ।
सम्भाले नहीं सम्भलता मन मेरा, छलकता प्यार नजरों से तेरे ।
थिरकने रोक नहीं पाता खुद को, करीब पहूँचता हू जब तेरे ।
सब्र मेरा टूट जाता, जब गूँजे फिजा में मिश्री सो बोल तेरे ।
डूब गया जीवन का हर पल, प्यार के नशे में तेरे ।
दिल का क्या बताऊँ हाल, प्यार के नशे में तेरे ।
दिल का क्या बताऊँ हाल, जब हाल का पता ना हो खुद को ।
अब सब कुछ प्यारा लगने लगा, मगन जो हो गया तुझमें ।
राह में अपलक हो जाता हूँ, जब गुम हो जाता हूँ ख्यालों में तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह