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Hymn No. 117 | Date: 11-Dec-1997
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जीना है तो हो के तेरे लिये ही जीना
जीना है तो हो के तेरे लिये ही जीना
मरना है तो हो के तेरे लिये ही मरना ।
कौन जाने मौत के बाद हीं है जीवन
जीवन तो है बंधन श्वासों का ।
जब तक उस तन में है हम ;
तब तक तुझसे जुदा है हम ।
जीवन का हर लम्हां सुख दुख का ख्वाँब है ;
ख्वाबों का टूटना मौत है, मौत के बाद ही सत्य है ।
- डॉ.संतोष सिंह
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