My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 1202 | Date: 07-Jul-1999
Text Size
गुंज है चारों और ૐ की, सुनकर बेकरार हो उठा दिल मेरा ।
गुंज है चारों और ૐ की, सुनकर बेकरार हो उठा दिल मेरा ।
मन हो उठा बेचैन, ये गूँजे कहाँ से गूँजे, भीतर से की बाहर से ।
नजर दौडाई चारों ओर, नजर नहीं आया मेरे सिवाय कोई ओर ।
बंद आँखें करके ध्यान जब खुद पर किया, तो जाना गूँजे हो रही थी हवा की सरसराहटों से ।
फड़फड़ाटे उठा दिल भीतर ही भीतर, सुनकर आनंद से भरे गीतों को ।
दिल की झनझनाहट ने जगाया सोए हुए प्यार को, परम प्यार को पाने के वास्ते ।
खोई हुई स्मृतियाँ ताजा हो उठी, कल की बातें धीरे-धीरे याद आने पर ।
सपने जो अधूरे थे, उसे पूरा करने के लिए, दृढ़ हो गया खोया प्यार पाकर ।
रोम-रोम भर गया उमंगों से, जब पाया परम को परम निहारते हुए ।
मैं तो भूला था माया में, पर उसने पलकें बिछाए रखी थी सदियों से ।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
नारायण-नर बनकर आया धरा पर, प्यार लुटाने के वास्ते ।
Next
गुनगुना हो उठा रोम-रोम मेरा, नाम लेते ही तेरा ।
*
*