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Hymn No. 1205 | Date: 10-Jul-1999
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पीला दे तू प्यार का जाम, बढ़ते जाए बेहिचक प्यार की डगर पर ।
पीला दे तू प्यार का जाम, बढ़ते जाए बेहिचक प्यार की डगर पर ।
अंजाम जो भी हो हमारा, हम मदहोश हो जाए प्यार के नशे में ।
फर्क न आए कभी दिल में, डूबा रहूँ तेरे प्यार के नशे में ।
बेकरार कर दे तेरा प्यार इतना, रूह और जिस्म का भान मिट जाए ।
दर्द देना तू अगर, तो प्यार भरा, सिलसिला चलता रहे प्यार का, उफ् ना करेंगे
मत ललकारना तू हमें प्यार में बेखौफ हो चुका हूँ तेरे प्यार में ।
अंदाज ना लगाना तू हमारे प्यार का, भूल-चूक माफ करना कहीं तू डूब न जाए
डूबानेवालों में से नहीं, ऐ साकी, हम तो खुद डूबने आए तेरे प्यार में ।
कश्मकश ना रही है मन में, हर कश टूट गई तेरे प्यार में ।
यार आदत बदल गई है मेरी, प्यार जो स्वभाव बन गया ।


- डॉ.संतोष सिंह