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Hymn No. 1206 | Date: 11-Jun-1999
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बैठते ही सामने तेरे, गुनगुना उठता है दिल मेरा ।
बैठते ही सामने तेरे, गुनगुना उठता है दिल मेरा ।
जो कहने से हिचक जाते है लब मेरे, वह कह देते है गीत मेरे ।
जीतने ना निकला हूँ मैं तुझे, खुद को हार जाना चाहता हूँ प्यार में तेरे ।
बेदर्दी तू कितनी भी चुरा ले नजर तेरी, सुननी पड़ेगी हर बात मेरी ।
सबकुछ चलो पाया है तेरी कृपा से, पाऊँगा मैं तुझे प्यार के सहारे ।
बहुत रोक रखा, अब रुकना हमें भाता नहीं, बस तेरा साथ हैं सुहाता ।
सच जान, हाँ गाता हूँ गीत सिर्फ तुझको सुनाने के वास्ते ।
होगा कितना भी दागदार मेरा जीवन, अब की बार बेदाग हूँ तेरे वास्ते ।
कोई भी ना दूँगा कारण इस बार, अब की करना पडेगा स्वीकार इस दास को ।
इंतजार का इम्तिहान बहुत बार दिया, करना पड़ेगा अब इकरार तुझे ।


- डॉ.संतोष सिंह