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Hymn No. 1209 | Date: 14-Jul-1999
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बन गया मैं पपीहा, काका देते- देते तोहे आवाज ।
बन गया मैं पपीहा, काका देते- देते तोहे आवाज ।
आँखों से बहे झर-झर आँसू, पर प्यास ना बूझे दिल की ।
कर ले तू कितनी अपने मन की, पल भर के लिए पास तू आ जा ।
जुदाई हमको भी है पसंद, पर इंतजारी नहीं ।
ये कौन-सा है इम्तिहान, जिससे गुजरना पड़ता है हम को हर पल ।
मत रख तू प्यार का अंदाज इतना निराला ।
हम तो सह लेंगे तेरी इनायत से, तौबा करेंगे लोग प्यार से ।
कोई बात हो गई हो अगर ऐसी वैसी, मुजरिम हाजिर है महफिल में तेरे ।
हिचकना मत सजा देने से, प्यार की वफा ना देंगे तुझे ।
प्यार में दे देना जो भी सजा, पर मत होने देना तुझसे जुदा ।


- डॉ.संतोष सिंह