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Hymn No. 1211 | Date: 15-Jul-1999
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शोर है जग में चारों ओर, तेरे नाम का प्रभु-प्रभु ।
शोर है जग में चारों ओर, तेरे नाम का प्रभु-प्रभु ।
ढूँढ रहा है दुनिया के कोने-कोने में, हर कोई प्रभु-प्रभु ।
अनंत को जानने का दावा करने लगे है, कई लोग प्रभु-प्रभु ।
विशालता को समेट दिया सीमित दायरे में हमने प्रभु-प्रभु ।
इस क्षुद्र की हिम्मत ना है इतनी, जो बाँध सके अल्प बुद्धि में अपने प्रभु-प्रभु
प्यार ही तुझसे पाया तो क्या कर पाऊँगा प्यार तुझे प्रभु -प्रभु ।
तेरी सेवा करना मेरे वश की बात नहीं, फिर भी सेवा करना चाहूँ प्रभु-प्रभु ।
दुनिया की क्या कहूँ अभी तो हम में है खोट कई प्रभु-प्रभु ।
जन्मगत स्वभाव को तू बदल सकता है पलभर में प्रभु-प्रभु ।
इशारा काफी है तेरा, अमूल्य पल ढल जाएगा पल में तुझमें प्रभु प्रभु ।


- डॉ.संतोष सिंह