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Hymn No. 1212 | Date: 15-Jul-1999
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आँखों में है तस्वीर तेरी, चित्त में है हमारे सुनहरी यादें ।
आँखों में है तस्वीर तेरी, चित्त में है हमारे सुनहरी यादें ।
फिर क्यों तरसाता है तू हमको मिलन के वास्ते ।
रोम-रोम श्रद्धा से ओत-प्रोत है, मन भी है करें वंदना तेरे सामने ।
मिल लेते है तेरी कृपा से, फिर भी तरस क्यों मिटती नहीं दिल की ।
करबद्ध है तन मेरा चरणों में तेरे, बेताब है रुह फनाह होने के लिए ।
ऐसी कौन-सी कमी है, जो दूर होना है अभी बाकी ।
तुझसे कुछ छुपा ना रहा, दिल की हर इक बात को तू है जानता ।
क्या ये सच नहीं, दिल को तेरे सिवाय अब कुछ रास आता नहीं ।
हर पल संग रहने का एहसास रहे दिल को, सुकून मिले मन को ऐसा तू कुछ कर दे ।
दिया हुआ है सब कुछ तेरा, जो चाहिए तुझे ले ले, पर प्यार कर लेने दे जी भरकर हमे ।


- डॉ.संतोष सिंह