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Hymn No. 1213 | Date: 16-Jul-1999
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अंग-अंग मेरा पुकार रहा है तेरे नाम को ।
अंग-अंग मेरा पुकार रहा है तेरे नाम को ।
मेरे मन के हर कोने में है तेरी छवि का जलवा ।
दिल तो पागल हो चुका है तेरी यादों के पीछे ।
बचा-कुचा जो था, हर लिया तेरे प्यार ने मेरे प्राणों को ।
मजा आ गया तेरे संग, जो मैं सारे जहाँ में समा गया ।
फुरसत ही फुरसत है, हर बात में आनंद है यहाँ पर ।
कोई फिक्र नहीं तो डर किस बात का, जो हर लिया तुमने ।
चारो और छाई है उमंगों से भरी मस्ती, आते-जाते रहे चाहे सुख-दुःख ।
हर भेद मिटता जा रहा है, ज्यों-ज्यों जुड़ता रहा हूँ तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह