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Hymn No. 1221 | Date: 20-Jul-1999
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तू ही बता कहाँ है कमियाँ मुझमें, कहूँगा मैं तुझसे दूर कर दे उसे ।
तू ही बता कहाँ है कमियाँ मुझमें, कहूँगा मैं तुझसे दूर कर दे उसे ।
माना की निर्लिप्त तन-मन दिया था तुमने, स्थान दिया गुणों-अवगुणों को हमने
तुमने लाख समझाया था, फिर भी फँसते चले गए हम ।
मजबूर थे, जो अपने ही मन को ठीक से ना जान पाए ।
जो सहज-सरल प्राप्य था, उसको कर्मों से दुष्कर बना दिया ।
सिखाया तुमने बार-बार, आकर तेरे ही अस्तित्व को हमने नकार दिया ।
माया की छाया से निकलना हुआ दुर्भर, जो तेरे पहलु से निकल गया ।
फिर भी दिल में है तेरा वास, ऐसा मन कहता है बार-बार ।
पर है विश्वास हमको, तेरा कहा पूरा कर दिखाएँगें हम ।
जान की बाजी लगा देगे हम, पर उठाया हुआ कदम पीछे ना लौटाएँगें ।


- डॉ.संतोष सिंह