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Hymn No. 120 | Date: 15-Feb-1998
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काका सीखा दो हमें जीना, मस्त रहे हम तुझमें ;
काका सीखा दो हमें जीना, मस्त रहे हम तुझमें ;
सुख दुःख की परवाह ना करे हम डूबे रहे तुझमें ।
जुबां पे नाम हो तेरा हर पल तो अच्छा है;
नाम भी लें तो तेरी यादों को संजोये रहे दिल में ।
लेना - देना न आयें मुझे, व्यवहार की इस दुनिया में हूँ मैं अजनबी
भाव के धागें में पिरोके आँसूओं के फूलों की माला अर्पित करता हूँ तूझे ।
तेरा संग पाने के लिये मैं जंग करने को हूँ तैयार खुदसे ;
दुश्वार है मैं बन के जीना, तेरी सरपरस्ती में जीवन गुजारना चाहूँ ;
अपने प्यार से निहाल करके तूझे तेरे संग रहना चाँहू ;
कहने को है सब कुछ है मेरे पास पर तेरे बिन अधूरा हूँ मैं ।


- डॉ.संतोष सिंह