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Hymn No. 1230 | Date: 24-Jul-1999
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असमंजस में पड़ जाता है दिल मेरा, जोडूँ तेरे संग कौन सा नाता ।
असमंजस में पड़ जाता है दिल मेरा, जोडूँ तेरे संग कौन सा नाता ।
कभी लगता है जी भरकर प्यार करुं तुझको, जीवन का पल-पल नाम कर दूं ।
किसी और दिन ये ख्याल आता है दिल में, तेरे चरणों में बैंठ, तेरी कृपा के गीत गाऊँ ।
प्रेम बरसाती तेरी निगाहें मस्त कर देती है मुझे, तब यार बनाने की तमन्ना जाग उठती है मन में ।
कभी जब घट जाता है हम से कोई घोर कर्म, बिलखते हुए आते है पास, तब तेरा ममतामय रूप नजर आता है ।
समझाने पर नहीं समझते है, जब-तक तू व्यवहारिक फटकार नही लगाता है पिता बनकर ।
ऊँची-नीची हर बातो की सूक्ष्मता का गुरु बनकर ज्ञान भरना तू है सीखाता ।
हम अपनी हर बात कह लेते है बंधु समझकर, मदत करता है तू भ्राता बनकर ।
तेरे एक ही रूप में छुपर है कितने स्वरूप, अचंभित हो जाता है मन मेरा ।
परम तू चाहे मिल जाए किसी भी रूप में, पर समा दे मगर आज तू मुझको अपने में ।


- डॉ.संतोष सिंह