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Hymn No. 1231 | Date: 24-Jul-1999
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जुल्म करना कोई तुझसे सीखे, और कहना ये तो है प्यार ।
जुल्म करना कोई तुझसे सीखे, और कहना ये तो है प्यार ।
तेरे पास तो है ज्ञान का खजाना, हर बात का कोई अर्थ बताना ।
मुस्कुराकर तू घायल कर देता है हमारे दिलों को और पूछे क्या हुआ ।
देखकर हैरान रह जाता, करके सब कुछ तू, कितना भोला बन जाता ।
ढेले भर की कींमत ना है हमारी, फिर भी तू हमे अमूल्य बनाता ।
तेरी विद्या है सबसे परे, निज आनंद में डूबके, गढ़ता प्रेम की मूरतों को ।
सूरत-सीरत कैसे भी हो, अपनाया प्यार से, जो तेरे करीब आया ।
तेरा फसाना है ऐसा, रहे हम कहीं और, रहता है दिल पास तेरे ।
तेरे प्यार में दर्द है, तो उसमें मिलता है हम सबको सुकून ।
सच्चाई से अनजान, अब तू ही है हमारे वास्ते सब कुछ ।


- डॉ.संतोष सिंह