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Hymn No. 1235 | Date: 26-Jul-1999
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मेरे प्रभु सदा से करीब हो तुम मेरे, इसका एहसास हमे हो या ना हो ।
मेरे प्रभु सदा से करीब हो तुम मेरे, इसका एहसास हमे हो या ना हो ।
अधुरे है हम हमेशा से, जब तक जुडे ना तुझसे, खेल चलता है जन्म-मरण का न जाने कब से ।
निभाया है तुमने तेरे धर्म को, हम ही न जान पाए तेरे दिल के मर्म को ।
बदल है पाया हर बार रहकर तेरे पास, समझाना-बुझाना भी कुछ काम न आया ।
साया बना फिरता तू हमारे पीछे-पीछे, जानते हुए मानते ना है तेरे बातों को ।
मन से उपजे हुए कर्मो के पीछे भाग-दौडके, गुजार देत है सारा जीवन अपना
लाख-लाख समझाया तुमने समझकर भी ना समझते हुए, होम किया जीवन सारा ।
सहारा सिर्फ संसार में है तेरा, संसार के सहारे कभी ना बह सके है हम ।
रख ले तेरे पास कैसे भी करके, चाहे तो बना ले तू मुझको अपना दास ।


- डॉ.संतोष सिंह