VIEW HYMN

Hymn No. 1236 | Date: 28-Jul-1999
Text Size
गुरुजी न चाहिए प्रेम हमको, न ही ज्ञान की दरकार रखते है ।
गुरुजी न चाहिए प्रेम हमको, न ही ज्ञान की दरकार रखते है ।

हमारा सरोकार बस तुझसे है, तेरे सिवाय कुछ ना है चाहते ।

पैसे की माँग क्यों करुँ, जब जरूरतें ना कभी होती है पूरी ।

तेरे श्री चरणो में मिल गई जो जगह, बैठे-बैठे ढाले पी लिया अमृत को हमने ।

प्रभु के बारे में सुना है, न जाना था कभी, पहचान की बात है किघर ।

तू प्रभु का है स्वरूप, कैसे कहूँ, तू तो है मेरा प्रभु ।

आज है गुरु पूर्णिमाँ, तेरी दक्षिणा देना मेरे वश की बात नहीं ।

जो चाहे तू माँग लेना, अर्पित करेंगे जरूर, हम तेरी कृपा से ।

सामर्थ्यहीन की विनंती है चरणों में तेरे, कबूल करना तू हमे ।

जैसी तेरी मूर्ति हो तू ढाल देना हमे, अधिकार हम पर है तेरा पूरा ।


- डॉ.संतोष सिंह