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Hymn No. 1238 | Date: 30-Jul-1999
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प्रभु रहना तू हमसे नाराज सदा, हमारी हर पल कोशिश हो रिझाने की तुझे ।
प्रभु रहना तू हमसे नाराज सदा, हमारी हर पल कोशिश हो रिझाने की तुझे ।
तू मानना कभी ना, चाहे कितना पखाँरूं आसुओं से तेरे चरणों को मैं ।
जब चाहे तू लतियाँ देना, खुश हो जाएगा ये बावरा, काबील जो बन गया तेरे मार के ।
हर सहारा छीन लेना, मजा आएगा हमको, साँस दर साँस जो तू याद आएगा ।
दूसरों की नाराजगी उतारना तू मुझपर सदा, अफसाना देखकर गाएगा दिल गीत ।
मीत न बनना हमको कभी, तेरी रूसवाई बुझने ना देगी तेरे प्यार को कभी ।
कसम हैं तुझे, सौंप दे सारे जग की पीडा मुझे, तड़पेंगे हम, तू कोई नृत्य समझना ।
मजा आएगा हमको देखकर आनंद तेरा, हर पल कहर तू अपना बरसाते जाना ।
अहमीयत ना रखना तू मेरी, मन में दे देना कोई नया भोग ।
हा छीन लेना तू सब कुछ, छीनना ना कभी मेरी तड़प, जो है तेरे वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह