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Hymn No. 1239 | Date: 31-Jul-1999
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लुभाया है तुमने दिल को मेरे, जो बावरा हो गया मैं पीछे तेरे ।
लुभाया है तुमने दिल को मेरे, जो बावरा हो गया मैं पीछे तेरे ।
तेरे ख्वाबों-खयालो में भटकता फिरुँ यहाँ-वहाँ मैं सारे जहाँ में ।
चैन न आए मेरे मन को, गाहे-बगाहे पहुँचे दर पर तेरे ।
निराश ना हूँ, प्यार पर है विश्वास, जो जीतेगा तेरे दिल को ।
कैसे बताऊँ हाल दिल का, गुनगुनाता रहता है याद कर-करके तुझे ।
कोई ना है कयास, ना ही कोई सवाल, प्यार के सिवाय कुछ ना है मन में ।
ज्यों-ज्यों तेरा सामीप्य पा रहा हूँ, ढलता जा रहा हूँ प्रेम कथाओं में ।
बाकी ना रह गई है कोई सोच- समझ, जो तेरे प्यार में उड़ गया होशो-हवाश मेरा ।
चाहता हूँ तेरा आशीष, तुझे अपने प्यार से पाने के वास्ते ।
मुझे है पूरा विश्वास, रखेगा तू चरणों के पास अपने ।


- डॉ.संतोष सिंह