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Hymn No. 1240 | Date: 01-Aug-1999
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ओ.. मेरे परम प्रिय प्रभु, आया है बनकर तू मेरा गुरु ।
ओ.. मेरे परम प्रिय प्रभु, आया है बनकर तू मेरा गुरु ।
साथ पकड़कर हमने छोडा कई बार, निभाया तुमने साथ हर बार ।
मुश्किलो से लडकर तुमने जीना सिखाया, प्रभु के पास जाने की राह बताई ।
तेरा अंदाज है सबसे निराला, तेरा प्रेम है सबसे आला ।
मैं प्यासा जन्मो-जन्म का, जो चखा मस्त हुआ तुझमें ।
हर कर्म करते हुए, बेफिक्री में रहकर जीना तुमने सिखाया ।
प्रेम से बदल दिया तुमने हमारे अव्यावहारिक कर्मो को ।
सुनी-सुनाई बातों का अंत हुआ, तेरे प्रेम में पड़कर ।
दम न था हमारे कर्मों में, दमदार बनाया तुमने हमे भीतर से ।
गुरु तुमने सिखाया धरा पर रहकर, अखिल ब्रह्मांड में विचरना ।
- डॉ.संतोष सिंह
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