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Hymn No. 1242 | Date: 04-Aug-1999
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काका से नाता जुड़ गया जो मेरा, नामभर का रह गया मैं ।
काका से नाता जुड़ गया जो मेरा, नामभर का रह गया मैं ।
शिकार किया निगाहों से, प्रित का बाण चलाकर, घायल हो गया दिल मेरा ।
तड़प उठा मन देखकर उसको, दौड़ पडा मन का साथ छोड़कर ।
जान गवाई हाथ उसके, फिर भी दिल को प्यार आया उसपर ।
समझ न आया इस रेत के ढेर में, पानी कहाँ से आया ।
प्रभु रिझाते है सब तुझको, रीझा लिया तुमने मुझे ।
मौत और जीवन के संग रहना आ गया, तेरा साथ पाते ही ।
अवरुद्ध हुए कंठों से फूट पडा स्वर, तेरा प्यार पाकर ।
जो ना सोचा, वह भी होने लगा, तेरे गीतो में डूबते ही ।
गंतव्य मेरा मिल गया, तेरे चरणो में पहुँचते ही ।


- डॉ.संतोष सिंह