VIEW HYMN

Hymn No. 1243 | Date: 04-Aug-1999
Text Size
मचलते हुए दिल से छलक रहा है प्यार तुझे चुमने के लिए ।
मचलते हुए दिल से छलक रहा है प्यार तुझे चुमने के लिए ।
दोष ना है मेरा, देखते ही तुझको छा जाता है आलम दीवानगी का ।
फिर भी माफी चाहता हूँ, प्यार में अगर हदे जो टूट गई हमसे ।
सिरफिरा समझ या मस्ताना, हमको तो तुझसे प्यार हो गया ।
हाथों में ना है कुछ मेरे, प्यार की तरंगों पर थिरकता है मन मेरा ।
आलम हर पल छाया रहता है दिलदार का, जो खोया था मिल गया ।
दरकार नहीं रखते है किसी और की, मेरा प्यार ही है मेरा सरोकार ।
अस्पष्ट तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट होने लगी है मेरे यार की ।
मेरी याददाश्त जाती रही, अपने प्यार के पीछे-पीछे ।
बची-कुची समझ थी जो, वह भी निकल गई यार के पीछे-पीछे ।


- डॉ.संतोष सिंह