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Hymn No. 1244 | Date: 06-Aug-1999
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नूर है तू हमारे दिल का, खिल उठता हूँ मैं तेरी कृपा से ।
नूर है तू हमारे दिल का, खिल उठता हूँ मैं तेरी कृपा से ।
दिया है तुमने बहुत कुछ कई बार, अब दे दे हमको अमिट प्यार तेरा ।
जुदा होकर भोगा है, माया के साम्राज्य को कई-कई बार ।
ऐ खुदा, अब हमको समेट ले, तेरे प्यार भरे दामन में ।
अब तू टालना ना मुझे, होगी जो कमी दूर कर दे तू ।
नाता जोडा है तुझसे प्यार का, तेरे प्यार में अंत कर दे तू मेरा ।
जरा-जरा सी बात पर, इस दिल से तू नाता मत तोड़, ये तो हो चूका है तेरा ।
अमानत है तेरी, जिसे तन में रखा है तुमने मेरे, जब चाहे तब ले लेना ।
अब तक खेला था खिलौना समझकर, तेरे पास आकर जाना अर्थ इसका ।
सजा जो भी देगा तू मंजूर है हमें, पर तुझसे दूर ना करना कभी ।


- डॉ.संतोष सिंह