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Hymn No. 1246 | Date: 07-Aug-1999
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मत चला तू हमपर तेरे नयनों के बाण, क्षत हो गया है दिल मेरा ।
मत चला तू हमपर तेरे नयनों के बाण, क्षत हो गया है दिल मेरा ।
आशिक हूं मैं तेरा सदियों पुराना, यहाँ कुछ भी नहीं तेरे प्रेम के सिवाय ।
मिला हूँ आज तो क्या, तेरे ख्वाबों से है मेरी दोस्ती पुरानी ।
गाया है गीत मिलन का कई-कई बार, बिछुड़ा तो क्या हुआ ।
अमर है तू, जन्म लिया हमने तेरे लिए हर बार ।
मायारूपी चक्रव्यूह में दम तोडा कई-कई बार, पर प्रयत्नो का साथ ना छोड़ा ।
रोड़े मिले राह में हजारों बार, पर आगे बढ़ता रहा हर बार ।
घर-बार छोड़ा कितनी बार, तेरे दरबार में आने के वास्ते ।
एहसास है तेरे प्यार का, साँस जब-तक लेंगे तेरा बनकर ।
कायल हूँ मैं तेम्हारा उसपर सवाल ना उठा, घायल हुआ है दिल तेरे प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह