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Hymn No. 1247 | Date: 08-Aug-1999
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भज ले, भज ले, भज ले तू गोविंद को ।
भज ले, भज ले, भज ले तू गोविंद को ।
बहुरूपिया आया है, रूप बदलकर धरा पर ।
ले लिया तू उसका नाम, जो पहुँचेगा पास उसके ।
काम कर ले तू जितना, हाथ न आएगा कुछ भी ।
ले लेगा दो आखर का नाम, वही साथ निभाएगा ।
बदलेगा हर रिश्त-नाता, चक्र ये चलता रहेगा ।
सच्चा प्यार-शाश्वत को पास खींच लाएगा ।
यार बनकर जीवन के रहस्यो को गीतो में पिरोना सिखाएगा ।
बदलेगा तू मानव तन में रहते हुए ।
सुख-दुःख में रहके, चिदानंद का प्रेम गीत गायेगा ।


- डॉ.संतोष सिंह