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Hymn No. 1248 | Date: 09-Aug-1999
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मेरे प्रभु सामने बैठा हूँ, तेरे दीदार के वास्ते ।
मेरे प्रभु सामने बैठा हूँ, तेरे दीदार के वास्ते ।
ना समझना तू इसको फरियाद हमारी ।
ये तो है दिल की आवाज, जो याद आते ही कह उठती है ।
झीना परदा हमारे बीच लज्जा और संकोच का जो है ।
चीर के रख देना चाहता हूँ, उसे अपने प्यार से ।
प्यार की पीछे बढ़ना चाहता हूँ रहकर इस संसार में ।
अनुरूप ढल जाए जीवन मेरा, तेरे चरणो के वास्ते ।
कसम खाता हूँ, बंद रास्ते खुल जाए प्यार करुँ तुझसे इतना ।
मैं कमजोर याचक तेरा, तू हा समर्थ-तीनों लोक का स्वामी ।
तेरे दासों की सुचि में बढ जाए, इक और नाम, कर ले तू स्वीकार इसे ।


- डॉ.संतोष सिंह