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Hymn No. 1250 | Date: 11-Aug-1999
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तन-मन झूम उठता है सामने पाकर तुझे ।
तन-मन झूम उठता है सामने पाकर तुझे ।
मन-मयुर बन थिरक उठता है, सुनकर गीतों को तेरे ।
दिल मगन हो जाता है, तेरा प्यार देखकर ।
रोम-रोम मेरा डूब जाता है, आनंद से भरे पलों में ।
जीने का होश रहता नहीं, मरने का डर लगता नहीं।
सवालमय जीवन का अर्थ निकल जाता, जब तू कुछ समझाता ।
नमन करते-करते, दिल रम जाता है तुझमें ।
समर्पित हो उठता है मन मेरा, तेरी यादों से घिरते ही ।
मिटने को हो उठता हूँ बैचेन, जब उमड़ता है प्यार का ज्वार ।


- डॉ.संतोष सिंह