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Hymn No. 1252 | Date: 12-Aug-1999
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आशिक है हम तेरे सदियों पुराने, रूप-रूप बदल-बदलके आता है तू दिल चुराने ।
आशिक है हम तेरे सदियों पुराने, रूप-रूप बदल-बदलके आता है तू दिल चुराने ।
प्यार करने लगे है तुझसे दीवानगी की हद तक, तोड़ देना चाहते है तन-मन के बंधन को ।
सूर छाया रहता है प्यार का, पार कर जाते है सारी मुश्किलों को ।
प्यार ही हमारी पूजा है, जो भुलाकर सब कुछ मग्न होना सीखाती है तुझमें ।
जीवन के हर रंजो-गम को जाते है, झेल यार तेरे प्यार के सहारे ।
हो जाए कुछ, लगता नहीं कुछ, जब तक वे खोए रहते है तेरे प्यार में ।
प्यार की ABC सीखकर गाते है हम जिंदादीली का राग ।
आग ही आग है सीने में हो जाता हूँ खाक, जब रहता हूँ बहुत दूर ।
गुरुर ना हमको किसी बात का, पर होता है दिल तो तेरे साथ होने पर ।
देर ये किस बात की हो रही है, कमी जो भी है कर दे आज तू पूरी ।


- डॉ.संतोष सिंह