VIEW HYMN

Hymn No. 1253 | Date: 13-Aug-1999
Text Size
आ गया परवाना प्यार लेकर तेरी महफिल में ।
आ गया परवाना प्यार लेकर तेरी महफिल में ।
जलकर होना पडा खाक तो हो जाएगें, इजहार करेंगे सरेआम ।
आलम है मुझपर दीवानगी का, बालम अपना बनाकर तुझे छोडेंगे ।
छूट जाए ये जग सारा, पर तेरा दामन ना छोडेंगे ।
निकले है प्यार की डगर पर, सर पर कफन बाँध के ।
खौफ निकल चुका है दिल से, डूबा है प्यार की मस्ती में ।
साहिल हूँ मैं ऐसा, जिसे ना तलाश है किनारे की ।
मौजों के संग रहकर बन जाना चाहता हूँ प्यार की इक तरंग ।
ना छेड़ो मुझे, मैं तो हूँ प्यार का झलझला ।
बहा ले जाऊँगा प्यार के दरियाँ में प्यार बनाकर ।


- डॉ.संतोष सिंह