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Hymn No. 1256 | Date: 15-Aug-1999
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मेरे दिल में है तू, मेरे मन में तू है, रोम-रोम में है तू ।
मेरे दिल में है तू, मेरे मन में तू है, रोम-रोम में है तू ।
नजरों में रहता है हर पल तू, हर साँस में समाया है तू ।
दिन-रात पीते है तेरे नाम का जाम, कोई और नहीं काम ।
फिक्र भी रहती है तेरी, जिक्र करते है हर क्षण तेरा ।
सहारा है हमको तेरा, टूटे-फूटे शब्दो में बयाँ करते है दास्ताँ प्यार की ।
आँसू निकलते है तो तेरे वास्ते, मुस्करा उठते है देखकर तुझको ।
कुछ भी ऐसा ना है पास, जिसपर तेरा नाम ना हो खुदा ।
अदा कर नहीं सकता तेरा कर्ज, दे दे तू मुझे प्यार का मर्ज ।
शिकार करने आया ना हूँ, शिकार होना चाहूँ तेरे प्यार का ।
फरियाद ना हूँ करता, यादो के लिए बहाना हूँ ढूँढता ।


- डॉ.संतोष सिंह