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Hymn No. 1257 | Date: 15-Aug-1999
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प्रभु, प्रभु, प्रभु कब आओगे द्वार मेरे ।
प्रभु, प्रभु, प्रभु कब आओगे द्वार मेरे ।
पलके बिछाए करुँ इंतजार तेरा, दिन-रात मैं ।
खत्म ना होता है सिलसिला तेरा यादो का ।
साँस थम-थमकर चल रही है, मुलाकात के वास्ते ।
उमंगों का संचार होता है दिल में, तेरे नाम से ।
हरदम छाया हुआ है तू, मन में मेरे ।
देर किस बात की हो रही है बता दे तू आज हमे ।
परिणाम की परवाह नहीं, खत्म करेगे तेरा नाम लेकर ।
मेरे नीरस जीवन में जो कुछ है, बस तेरा रसमय नाम है ।
प्रभु, प्रभु, प्रभु आ जाओ, मेरे घर में इक बार ।


- डॉ.संतोष सिंह