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Hymn No. 1259 | Date: 18-Aug-1999
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इक हसीना से हो गई मुलाकात, छूट गया मेरा पसीना ।
इक हसीना से हो गई मुलाकात, छूट गया मेरा पसीना ।
दोष ना था कुछ उसका, दिल मे अलग उसे तुझसे कैसे माना ।
उधेड़बुन में मैं फँसा, मन में ये फर्क कहाँ से आया ।
साए की तरह तू रहता है, अँधियारे में भी तू साथ-साथ चलता है ।
नजरों में बसी थी तेरी छवि, तो मन ने देखी कैसे अलग ।
छीन ले ज्योत मेरी, तेरी निगाहों से देखेंगे तुझे ।
मेरा एतबार फलेगा-फूलेगा, श्रद्धा से प्रभु तेरे प्यार में ।
झुकाना किसी के वश में ना होगा, रमण करुँगा जो तुझ में ।
ये अदना हो जाएगा तिगुना तेरी गोद में समाकर ।
दम निकलने का डर निकल जाएगा, तेरे प्यार में डूबकर ।


- डॉ.संतोष सिंह