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Hymn No. 1260 | Date: 20-Aug-1999
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दिल सँभाले नहीं सँभलता, देखते ही तुझको ।
दिल सँभाले नहीं सँभलता, देखते ही तुझको ।
दूर रहने पर, डूबा रहता हूँ तेरे ही ख्यालो में ।
मन नहीं मानता, तेरे बिना, कितना भी मिल लू तुझसे ।
रोग है ये कैसा, जो मुझको समझ नहीं आता ।
पास रहकर भी तेरे, तड़प क्यों नहीं मिटती पास आने की ।
सजदा करते है, प्यार पाने के लिए तेरा ।
कैसे मिटेगी तेर-मेरे दिलो की बाच की दूरी ।
प्यार चाहते है तेरा, फिर बेवफा क्यों है कहलाते ।
जो बात हमको समझ नहीं आती, वह क्यों तू नहीं कहता ।
अंजाम की परवाह नही है, नशा किया है जो प्यार का तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह