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Hymn No. 1261 | Date: 20-Aug-1999
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नशा छाया है हमपर तेरे प्यार का, परवाह क्यों करे किसी और की ।
नशा छाया है हमपर तेरे प्यार का, परवाह क्यों करे किसी और की ।
बेखुदी में जीते है हम, सुबह-शाम तेरे नाम का जाम पीते हुए ।
हालत क्या होगी प्यार में, सच पूछो तो ना खबर है कुछ हम को ।
जनाजा निकलता है मेरा, तो भी रहेंगे चूर हम तेरे प्यार में ।
लग गई है आदत, छुडाए ना छुड़ेगी, चाहे देनी पड़े कितनी भी किमत ।
औकात में मेरे ना है कुछ, बिनावजह जो भी कहता हूँ, उसके पीछे है हाथ तेरा।
साथियों निभाना पड़ेगा साथ, चाहे कितना भी गुजर जाए वक्त ।
अगर-मगर कुछ भी ना सुनना चाहता हूँ बना ले तू मुझको तेरा जिगर ।
बरस जाती है कहर समय की, एक पल भी जब गुजरे तेरे बगैर ।
मत करना तू कुछ ऐसा कि उड़ जाए होश मेरा, हम तो चाहते है, होश खोना प्यार में तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह